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बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की शुरुआत: समाज में बदलाव और जागरूकता का प्रयास | Current Affairs November 2024

भारत में "बाल विवाह मुक्त भारत" अभियान की शुरुआत दिल्ली के विज्ञान भवन में की जाएगी, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में बाल विवाह को समाप्त करना है। इस अभियान का उद्घाटन महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी द्वारा किया जाएगा। महिला और बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर भी इस अवसर पर मौजूद रहेंगी।


अभियान की पृष्ठभूमि

यह अभियान “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” योजना से प्रेरित है, जो 22 जनवरी 2015 को शुरू की गई थी। इस पहल ने समाज में लड़कियों के प्रति सोच और दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण बदलाव लाने में मदद की। अब यह अभियान बाल विवाह को समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित करके इस बदलाव को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा।

बाल विवाह समाप्त करने का महत्व

भारत में बाल विवाह की प्रथा शुरू से ही बड़ी समस्या बनी हुई है। लगभग पांच में से एक लड़की 18 साल की उम्र से पहले शादी कर लेती है। यह प्रथा न केवल उनकी शिक्षा में रुकावट डालती है, बल्कि उन्हें जल्दी ही देखभाल करने वाली जिम्मेदारियों में भी डाल देती है। इससे इन लड़कियों को मिलने वाले कई महत्वपूर्ण अवसर खो दिए जाते हैं।

अभियान के उद्देश्य

"बाल विवाह मुक्त भारत" अभियान प्रधानमंत्री के 2047 तक "विकसित भारत" के लक्ष्य से मेल खाता है। यह महिलाओं और लड़कियों के लिए समान अवसरों की आवश्यकता को प्रमुखता देता है। अभियान का उद्देश्य युवा लड़कियों को सशक्त बनाना और उनकी शिक्षा, कौशल और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। इस अभियान के द्वारा समाज में बदलाव और जागरूकता लाने का प्रयास किया जायेगा |

प्रतिज्ञा और भागीदारी

इस अभियान के शुभारंभ के दौरान बाल विवाह के खिलाफ एक प्रतिज्ञा ली जाएगी। इस अभियान में 25 करोड़ नागरिकों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। यह सामूहिक प्रयास बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करेगा और लड़कियों के अधिकारों का समर्थन करेगा।

ऑनलाइन जागरूकता मंच

इस कार्यक्रम के दौरान “बाल विवाह मुक्त भारत” पोर्टल की शुरुआत की जाएगी। यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बाल विवाह के बारे में जागरूकता फैलाने और मामलों की रिपोर्टिंग के लिए संसाधन प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देना और बाल विवाह की रोकथाम में मदद करना है।

इस कार्यक्रम में विभिन्न हितधारकों की भागीदारी होगी, जिनमें बाल विवाह निषेध अधिकारी, नागरिक समाज संगठन और सरकारी अधिकारी शामिल होंगे। 

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