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न्यायधीश वी. रामासुब्रमण्यम को किया गया राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का नया अध्यक्ष नियुक्त


भारत सरकार द्वारा हाल ही में की गई महत्वपूर्ण नियुक्ति के तहत, सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश वी. रामासुब्रमण्यम को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह घोषणा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की, जो न्यायपालिका और मानवाधिकारों के क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए की गई है।

V Ramasubramanian

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का कार्य

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भारत में मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन का कार्य करने वाली एक प्रमुख संस्था है, जो नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। NHRC के अध्यक्ष और सदस्य मानवाधिकारों से जुड़ी कई अहम समस्याओं पर गौर करते हैं, जैसे :- पुलिस बर्बरता, बाल अधिकार, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अन्य समाजिक मुद्दे।

वी. रामासुब्रमण्यम की नियुक्ति

वी. रामासुब्रमण्यम की नियुक्ति एक अहम कदम है, क्योंकि उन्होंने अपने करियर के दौरान न्यायपालिका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके अनुभव और न्यायिक कार्यप्रणाली का लाभ NHRC को मिलेगा, जिससे आयोग को मानवाधिकारों से संबंधित मामलों में नये दृष्टिकोण और तेज़ी से कार्य करने में मदद मिलेगी।

प्रियंक कनोऑगो और डॉ. न्यायमूर्ति बिद्युत रंजन सारंगी की नियुक्ति

साथ ही, प्रियंक कनोऑगो और डॉ. न्यायमूर्ति बिद्युत रंजन सारंगी (सेवानिवृत्त) को भी आयोग के नए सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। प्रियंक कनोऑगो ने बाल अधिकारों और किशोर न्याय के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, और वे अब NHRC के सदस्य के रूप में कार्य करेंगे। उनका अनुभव बच्चों के अधिकारों को लेकर आयोग को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगा। वहीं, डॉ. न्यायमूर्ति बिद्युत रंजन सारंगी, जो पूर्व में ओडिशा उच्च न्यायालय के न्यायधीश रहे हैं, उनका भी आयोग में शामिल होना NHRC के लिए एक अतिरिक्त संपत्ति होगी। उनके न्यायिक अनुभव और समाज में न्याय व्यवस्था को सुधारने के उनके प्रयासों को आयोग में और मजबूती मिलेगी।

पूर्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा का योगदान

यह नियुक्ति पूर्व NHRC अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा के सेवानिवृत्त होने के बाद की गई है। न्यायमूर्ति मिश्रा ने अपने कार्यकाल में आयोग के कार्यों को नया दिशा दी थी और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों में कई महत्वपूर्ण फैसले किए थे। अब नए नेतृत्व के तहत आयोग को और बेहतर तरीके से मानवाधिकारों की रक्षा करने की उम्मीद है।

NHRC का भविष्य और प्राथमिकताएं

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के इस नए नेतृत्व में मानवाधिकारों की रक्षा, नागरिक स्वतंत्रताओं को बढ़ावा देना, और समाज के प्रत्येक वर्ग के अधिकारों को सुनिश्चित करना मुख्य प्राथमिकता रहेगी। NHRC का कार्यक्षेत्र न केवल देशभर में मानवाधिकारों का उल्लंघन रोकना है, बल्कि जागरूकता फैलाना और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाना भी है।

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