क्रिया किसे कहते हैं ?
जिस शब्द अथवा पद के द्वारा किसी काम का करना या होना पाया जाता है | उसे क्रिया कहते हैं |
जैसे:-
पक्षी आकाश में उड़ रहे हैं |
महेश आंगन में घूमता है |
सुरेश रात को दूध अवश्य पीता है |
बर्फ पिघल रही है |
महेश आंगन में घूमता है |
सुरेश रात को दूध अवश्य पीता है |
बर्फ पिघल रही है |
उपर्युक्त वाक्य में उड़ रहे हैं, घूमता है, पीता है, पिघल रही है, शब्दों से होने अथवा करने की प्रक्रिया का बोध होता है अतः यह क्रिया पद है |
क्रिया के प्रकार
क्रिया दो प्रकार की होती है अकर्मक और सकर्मक
अकर्मक क्रिया
जिस क्रिया में कर्म की आवश्यकता नहीं होती है अर्थात जिस क्रिया के फल और व्यापार दोनों 'कर्ता' में रहते हैं | उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं |
जैसे :- राम सोता है | यहां 'सोना' क्रिया का 'फल और व्यापार' दोनों कर्ता 'राम' पर पड़ रहे हैं | अतः 'सोना' अकर्मक क्रिया है | इस वाक्य में कर्म का प्रयोग नहीं है |
सकर्मक क्रिया
जिस क्रिया के प्रयोग में कर्म की आवश्यकता पड़ती है | उसे 'सकर्मक क्रिया' कहते हैं | सकर्मक क्रिया कर्म के अभाव में अपना पूरा अर्थ प्रकट करने में असमर्थ रहती है |
दूसरे शब्दों में जिस क्रिया के व्यापार का फल कर्म पर पड़ता है उसे सकर्मक क्रिया कहा जाता है |
जैसे :-
मोहन पेड़ देख रहा है |
श्याम ने घड़ी खरीदी |
राम पत्र लिखेगा |
रमेश खाना खाएगा |
इन वाक्यों में पेड़, घड़ी, पत्र, खाना आदि कर्म है | इनके अभाव में वाक्य अपूर्ण रह जाता है और अर्थ स्पष्ट नहीं होता है |
प्रेरणार्थक क्रिया किसे कहते हैं
जिस क्रिया से इस बात का पता चले कि कर्ता स्वयं काम ना करके किसी दूसरे को काम करने के लिए प्रेरित कर रहा है | उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं |
जैसे :-
रेखा नौकर से सफाई करवाती है |
ठेकेदार मजदूर से ईंट उठवाता है |
अफसर चपरासी से फाइल मंगवाता है |
संयुक्त क्रिया किसे कहते हैं
संयुक्त क्रिया दो या दो से अधिक धातुओं के योग से बनी हुई क्रियाओं को संयुक्त क्रियाएं कहते हैं |
जैसे:-
वह लिख लिया करता है |
उसे जाने दिया जा सकता है |

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