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शब्द, पद तथा शब्द और पद में अंतर

शब्द 

दो या दो से अधिक सार्थक वर्णों के मेल को शब्द कहते हैं | जैसे - राम, रावण, चलना, दौड़ना आदि |

शब्द का प्रत्यक्ष रूप 

भाषा में जब शब्द कर्ता में बिना परसर्ग के आता है तो वह अपने मूल रूप में आता है | इसे ही शब्द का प्रत्यक्ष  रूप कहते हैं | जैसे वह, लड़का, मैं आदि |

शब्द का तियर्ग रूप

जब शब्द अन्य कारकों में परसर्गों से पहले वही शब्द भिन्न रूप में आता है | इसे शब्द का तियर्ग रूप कहते हैं | जैसे- उस (लड़के) ने, मुझ (को) |

पद

जब किसी शब्द को व्याकरण के नियमों के अनुसार किसी वाक्य में प्रयोग किया जाता है तब वह पद बन जाता है | जैसे- राम,रावण, मारा शब्द है | इनमें विभक्तियों, परसर्ग, प्रत्यय आदि को जोड़कर पद बन जाता है | जैसे- 'राम ने रावण को मारा' |

शब्द और पद में अंतर 

शब्द भाषा की स्वतंत्र और सार्थक इकाई है और वाक्य के बाहर रहता है, परन्तु जब शब्द वाक्य के अंग के रूप में प्रयोग किया जाता है तो इसे पद कहते हैं | जैसे- 'लड़का, मैदान, खेलना' शब्द हैं | इन शब्दों से यह वाक्य बनाने पर ये पद बन जाते हैं | जैसे- 'लड़के मैदान में खेलते हैं' |

कोशीय शब्द 

जिस शब्द का अर्थ शब्दकोश से प्राप्त हो जाए उसे कोशीय शब्द कहते हैं | जैसे- मनुष्य, घोड़ा |

पद के पाँच भेद हैं 

  1. संज्ञा 
  2. सर्वनाम 
  3. विशेषण 
  4. क्रिया 
  5. अव्यय

व्याकरणिक शब्द 

व्याकरणिक शब्द उस शब्द को कहते हैं जो व्याकरणिक कार्य करता है | जैसे- 'मुझसे विद्यालय नहीं जाया जाता' |



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