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गोवा ने मनाया अपना 63वां आजादी दिवस

गोवा ने 19 दिसंबर 2024 को अपना 63वां आजादी दिवस मनाया, जो 1961 में पुर्तगाली औपनिवेशिक शासन के अंत की याद दिलाता है। यह दिन गोवा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, क्योंकि इस दिन पुर्तगाली शासन को समाप्त करने के बाद गोवा भारतीय संघ का हिस्सा बन गया। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता सेनानियों और सशस्त्र बलों के योगदान की सराहना की और गोवा के लोगों के लिए समृद्ध भविष्य की कामना की।

गोवा आजादी दिवस


गोवा की आजादी का ऐतिहासिक संदर्भ

गोवा की आजादी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 1961 में भारतीय सशस्त्र बलों ने 'ऑपरेशन विजय' के तहत यह आजादी प्राप्त की। यह एक सैन्य अभियान था जो 36 घंटे के भीतर पुर्तगाली शासन को समाप्त कर गोवा को भारत में शामिल कर लिया। इस ऑपरेशन की सफलता ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बाद के दौर को परिभाषित किया, क्योंकि गोवा भारतीय सीमा में शामिल होने वाला अंतिम राज्य था। यह भारतीय राष्ट्र के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक कदम था, जो यह दर्शाता था कि भारत ने अपनी स्वतंत्रता के बाद भी शेष उपनिवेशों को स्वतंत्रता दिलाने के लिए संघर्ष किया।

स्वतंत्रता सेनानियों की भूमिका

गोवा की आजादी केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं थी, बल्कि यहां के स्वतंत्रता सेनानियों की महान भूमिका थी। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान गोवा के कई नागरिकों ने पुर्तगाली शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बाद भी, जब बाकी देश स्वतंत्र हो गए थे, गोवा 1961 तक पुर्तगाल के कब्जे में था। इस दौरान कई गोवा के लोगों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम से प्रेरित होकर संघर्ष किया। 

समारोह और श्रद्धांजलि

आजादी दिवस के पूर्व मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने गोवा के स्वतंत्रता संग्राम की अहमियत को उजागर किया तथा उनके संघर्षों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। प्रमोद सावंत ने यह भी कहा कि गोवा की आजादी दिवस सिर्फ स्वतंत्रता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह वह दिन है जब गोवा के लोगों ने अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता और सम्मान की लड़ाई लड़ी। उन्होंने पुर्तगाली उपनिवेशी शासन के दौरान हुए कष्टों और अत्याचारों को याद करते हुए स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन किया।

गोवा की सांस्कृतिक धरोहर

गोवा का सांस्कृतिक इतिहास अत्यधिक समृद्ध और विविधतापूर्ण है, जिसमें पुर्तगाली प्रभाव को प्रमुखता से देखा जा सकता है। आजादी के बाद, गोवा ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर को भारतीय संदर्भ में पुनः अपनाया। गोवा की संस्कृति, यहाँ की कला, संगीत, नृत्य, और धार्मिक विविधता इसकी पहचान बन चुकी है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि गोवा के लिए न केवल स्वतंत्रता का प्रतीक है, बल्कि यह इस राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव भी है।

गोवा के लोग अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को बनाए रखते हुए भारतीय समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हैं। आजादी के बाद, गोवा ने न केवल अपनी पहचान को सशक्त किया, बल्कि भारतीय संस्कृति में भी अपनी अहम भूमिका निभाई।

गोवा का आजादी दिवस न केवल एक ऐतिहासिक घटना है, बल्कि यह स्वतंत्रता, संघर्ष और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक भी है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य गोवा के लोगों के अदम्य साहस और संघर्ष की याद दिलाना है। आजादी दिवस गोवा के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर को सम्मानित करने का एक अवसर है, और यह हर गोवावासी के लिए गर्व का कारण है।

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