क्या है MRSAM?
MRSAM (मीडियम-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल) एक मीडियम रेंज की मिसाइल है, जिसका रेंज 1,000 किमी से 3,000 किमी तक है। यह मिसाइल रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) द्वारा विकसित की गई है, जबकि इसकी उत्पादन जिम्मेदारी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के पास है। MRSAM को हेलीकॉप्टरों, लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और अन्य विमान जैसे हवाई खतरों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। BARAK-8 इसका थल-आधारित संस्करण है।
MRSAM के तकनीकी विवरण:
- लॉन्च और वजन: यह एक हाई-रिस्पांस, ऊर्ध्वाधर लॉन्च होने वाली मिसाइल है, जिसका वजन 275 किलोग्राम है।
- कार्यप्रणाली: यह एक प्रोक्सिमिटी फ्यूज़ का उपयोग करती है, जो लक्ष्य के पास आने पर विस्फोट करती है। मिसाइल रेडियो तरंगों को उत्सर्जित करती है और ये तरंगें लक्ष्य से परावर्तित होती हैं, जिससे मिसाइल सक्रिय होती है।
- नियंत्रण: इसे रडार के माध्यम से दूर से या शिप के निकटस्थ स्थान से नियंत्रित किया जा सकता है।
रोजगार सृजन: MRSAM अनुबंध से लगभग 3.5 लाख मानव-दिनों का रोजगार सृजित होने की उम्मीद है, जिससे विभिन्न सूक्ष्म, लघु और मंझले उद्योगों (MSMEs) को लाभ मिलेगा।
स्वदेशी प्रौद्योगिकी पर ध्यान: MRSAM प्रणालियाँ "खरीदें (भारतीय)" श्रेणी के तहत बनाई जाएंगी, जो स्वदेशी सामग्री का उपयोग करती हैं। यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के व्यापक उद्देश्य से मेल खाता है।
मेक इन इंडिया की उपलब्धियाँ: भारत की नौसेना ने स्वदेशीकरण में महत्वपूर्ण प्रगति की है और 40 में से 39 नौसैनिक जहाजों का निर्माण स्वदेश में किया है। प्रमुख परियोजनाओं में विमानवाहक पोत INS विक्रांत और परमाणु पनडुब्बियाँ INS अरिहंत और INS अरिघाट शामिल हैं।
रक्षा उत्पादन में वृद्धि:
भारत में रक्षा उत्पादन 1.25 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है और इसे 100 से अधिक देशों में निर्यात किया जा रहा है। सरकार उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने के लिए प्रमुख निर्माण केंद्र स्थापित कर रही है।
इस अनुबंध से भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ रोजगार सृजन और प्रौद्योगिकी में सुधार होगा।
MRSAM की विकास यात्रा
MRSAM का विकास रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) के सहयोग से किया गया था। इसमें इज़राइल के उन्नत मिसाइल तकनीक और भारत के स्वदेशी विकास की शक्ति का संयोजन है। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) इस प्रणाली के निर्माण का प्रमुख जिम्मेदार है, जो देश में आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है।
रोजगार सृजन और स्वदेशीकरण
इस परियोजना के तहत स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे न केवल रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी प्रौद्योगिकी का विकास होगा, बल्कि देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। अनुमान है कि इस अनुबंध से 3.5 लाख मानव-दिनों का रोजगार सृजित होगा, जो विभिन्न सूक्ष्म, लघु और मंझले उद्योगों (MSMEs) को लाभान्वित करेगा।
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भरता
भारत सरकार का ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे पहल के तहत इस प्रणाली का निर्माण किया जा रहा है। MRSAM जैसे स्वदेशी रक्षा उपकरण भारत को विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने और अपने रक्षा उत्पादन को बढ़ाने में मदद करेंगे।
भारत की रक्षा क्षमता में वृद्धि
भारत की रक्षा उत्पादन क्षेत्र ने एक नई दिशा में प्रगति की है। अब तक, भारत ने 40 में से 39 नौसैनिक जहाजों का निर्माण स्वदेश में किया है। इसके साथ ही, भारत द्वारा निर्मित परमाणु पनडुब्बियाँ INS अरिहंत और INS अरिघाट जैसे प्रोजेक्ट्स को वैश्विक मंच पर सराहा जा रहा है।
भारत का रक्षा निर्यात भी बढ़ा है, और अब यह 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात कर रहा है। सरकार का उद्देश्य देश में प्रमुख रक्षा निर्माण हब स्थापित करना है, जिससे भारत को वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का एक अहम हिस्सा बनाने में मदद मिलेगी।
निष्कर्ष
MRSAM परियोजना भारत के रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के साथ-साथ देश की सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। इस प्रकार के उन्नत उपकरणों का निर्माण भारत को न केवल आंतरिक सुरक्षा में मदद करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उसकी स्थिति को सशक्त करेगा।

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