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"भारत के ऊर्जा सुरक्षा के लिए 2024 तेल क्षेत्र (Regulation and Development) संशोधन विधेयक: घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम"

 राज्यसभा में 2024 का तेल क्षेत्र (Regulation and Development) संशोधन विधेयक चर्चा के लिए प्रस्तुत किया गया था, लेकिन सत्र समाप्त होने तक इस पर कोई फैसला नहीं हो पाया। यह विधेयक तेल और गैस कंपनियों के लिए नीतियों को स्थिर करने का उद्देश्य रखता है और अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता को बढ़ावा देने के लिए एक उपाय के रूप में प्रस्तुत किया गया है। मुख्य उद्देश्य घरेलू तेल उत्पादन को बढ़ावा देना और महंगे तेल आयात पर निर्भरता को कम करना है, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

भारत के तेल आयात की वर्तमान स्थिति

भारत का तेल आयात निरंतर बढ़ रहा है और यह निर्यात से तीन गुना अधिक है। वर्तमान में, भारत को लगभग 85% तेल आयात करना पड़ता है, जबकि देश का घरेलू उत्पादन आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इस परिस्थिति में तेल आयात की बढ़ती लागत, भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव डालती है। भारत सरकार ने इस स्थिति में सुधार के लिए कई योजनाओं को प्रस्तावित किया है, ताकि देश का घरेलू उत्पादन बढ़ सके और आयात पर निर्भरता कम हो सके।

विधेयक का मुख्य उद्देश्य

इस विधेयक में "खनिज तेल" की परिभाषा को विस्तारित किया गया है, जिससे शेल तेल, गैस हाइड्रेट्स और टाइट गैस को भी शामिल किया गया है। यह विधेयक पेट्रोलियम उत्पादन के नियमों को सरल बनाने के लिए नया "पेट्रोलियम पट्टा" पेश करता है। इसका उद्देश्य अन्वेषण और उत्पादन कार्यों में आसानी लाना है, जिससे कंपनियों को अधिक स्पष्टता मिले और फालतू अनुमतियों से बचा जा सके।

विस्तारित नियामक शक्तियाँ

विधेयक के तहत, केंद्र सरकार की नियामक शक्तियों में विस्तार किया जाएगा। अब सरकार उत्सर्जन कमी के लिए नए नियम बना सकेगी। इसके अलावा, सरकार को उत्पादन सुविधाओं को साझा करने और पट्टा विवादों का समाधान करने की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। विधेयक में तेल क्षेत्रों के हरित प्रौद्योगिकियों जैसे हाइड्रोजन उत्पादन और कार्बन कैप्चर के लिए भी प्रोत्साहन दिया गया है, जो पर्यावरणीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं।

पेनल्टी और दंड का प्रावधान

विधेयक में उल्लंघन के लिए दंड के तौर पर आपराधिक आरोपों के स्थान पर अब प्रशासनिक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। इससे कंपनियों को नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, साथ ही साथ उनके लिए नवाचार को बढ़ावा देने का एक अवसर मिलेगा। जुर्माने को बढ़ाकर, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कंपनियां सभी नियामक मानकों का पालन करें।

प्रतिबंधित क्षेत्रों में तेल अन्वेषण

अब विधेयक में तेल अन्वेषण के लिए पहले प्रतिबंधित क्षेत्रों को खोलने की अनुमति दी जाएगी। इनमें "नो-गो" क्षेत्र शामिल हैं, जैसे मिसाइल परीक्षण क्षेत्र, जो पहले तेल अन्वेषण के लिए बंद थे। इससे देश के बड़े भू-भागों में तेल अन्वेषण की संभावना खुल जाएगी, जो भविष्य में तेल उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगा। इस बदलाव से पहले जिन परियोजनाओं में देरी हो रही थी, अब उन्हें तेजी से पूरा किया जा सकेगा।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का कहना है कि तेल आयात में कमी तभी संभव है जब घरेलू उत्पादन की वृद्धि तेजी से हो। घरेलू उत्पादन को बढ़ाना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सौर, पवन और बायोमास ऊर्जा के क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ाना होगा। यह विधेयक केवल एक कदम है, और लंबी अवधि में भारत को ऊर्जा के विविध स्रोतों की ओर बढ़ने की आवश्यकता है।

इस विधेयक से सरकार की योजना है कि भारत को ऊर्जा आयातक से एक ऊर्जा निर्यातक देश के रूप में स्थापित किया जा सके।

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