परियोजना के उद्देश्य:
1. पौधों के स्वास्थ्य का समर्थन:
इस परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य बागवानी क्षेत्र में पौधों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है। पौधों का सही तरीके से स्वास्थ्य देखभाल किया जाने से किसानों की उत्पादकता में वृद्धि होगी और वे अधिक मुनाफा कमा सकेंगे।2. कृषि उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार:
बागवानी के विकास से फसल की गुणवत्ता और पैदावार में सुधार होगा, जिससे कृषि उत्पादों का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी मूल्य मिलेगा।3. जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का मुकाबला:
यह परियोजना जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए भी महत्वपूर्ण है। जलवायु परिवर्तन के कारण बागवानी क्षेत्र में विभिन्न चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं, और यह परियोजना किसानों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने में मदद करेगी।प्रमुख पहलें:
1. स्वच्छ संयंत्र केंद्रों की स्थापना:
परियोजना के अंतर्गत स्वच्छ संयंत्र केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य रोग-मुक्त रोपण सामग्री का निर्माण करना है, ताकि किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध हो सकें।2. प्रमाणीकरण प्रणाली:
परियोजना के तहत एक प्रमाणन प्रणाली लागू की जाएगी, जो निजी नर्सरी को प्रमाणित करेगी। इस प्रणाली से यह सुनिश्चित होगा कि किसानों को विश्वसनीय और उच्च गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री प्राप्त हो।3. हितधारक सहभागिता:
इस परियोजना में विभिन्न हितधारकों को शामिल किया जाएगा, जैसे कि राज्य सरकारें, निजी नर्सरी, शोधकर्ता और किसान संघ। इन सभी के साथ परामर्श किए जाएंगे, ताकि इस पहल को दीर्घकालिक सफलता मिल सके।वित्तीय सहायता और साझेदारी:
इस परियोजना के लिए एशियाई विकास बैंक द्वारा 98 मिलियन डॉलर का ऋण प्रदान किया गया है, जो किसानों और बागवानी उत्पादकों को उच्च गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री और कृषि प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। यह परियोजना भारत सरकार की "आत्मनिर्भर स्वच्छ संयंत्र कार्यक्रम (CPP)" के तहत कार्यान्वित की जाएगी, जो बागवानी क्षेत्र में स्थिरता और विकास सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन की गई है।आत्मनिर्भर स्वच्छ संयंत्र कार्यक्रम (CPP):
CPP का उद्देश्य भारत में पौधों के स्वास्थ्य प्रबंधन को सुधारना है। यह परियोजना रोग-मुक्त रोपण सामग्री प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करती है, ताकि किसानों की उत्पादकता और फसल में वृद्धि हो सके।
इसके लाभ:
- किसानों को उच्च गुणवत्ता और रोग-मुक्त पौधे मिलेंगे, जो उनकी उत्पादकता को बढ़ाएंगे।- फसल की पैदावार और गुणवत्ता में सुधार होगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए लचीलापन में सुधार होगा।
- बागवानी क्षेत्र में समग्र विकास होगा, जिससे कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।
यह समझौता बागवानी क्षेत्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल किसानों के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि यह देश के
समग्र कृषि क्षेत्र की स्थिरता और वृद्धि में भी योगदान देगा।

0 Comments