हाल ही में मिज़ोरम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने वर्षा-प्रिय सर्पों की एक नई प्रजाति की खोज की है, जिसका वैज्ञानिक नाम स्मिथोफिस लेप्टोफास्सियाटस (Smithophis Leptofasciatus) रखा गया है। यह प्रजाति स्मिथोफिस (Smithophis ) वंश (Genus) से संबंधित है, जो अर्ध-जलीय (Semi-Aquatic) साँपों के लिए जाना जाता है। ये प्रायः ऐसे क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वर्षा अधिक होती है और नमी प्रचुर मात्रा में होती है।
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| Smithophis Leptofasciatus |
इस नए साँप का नाम ग्रीक और लैटिन
शब्दों के संयोजन से लिया गया है। “लेप्टो” का अर्थ है संकरी या पतली, और “फास्सियाटस” का अर्थ है पट्टेदार । नाम का अर्थ है “संकरे पट्टों वाला”, जो इसकी पीठ पर मौजूद विशिष्ट धारियों (Dorsal Markings) को दर्शाता है। इसे
सामान्य रूप से संकरी पट्टियों वाला वर्षा-साँप (Narrow-banded rain snake) भी कहा जाता है।
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| Narrow-Banded Rain Snake |
इस खोज के साथ ही, ज्ञात स्मिथोफिस प्रजातियों की कुल संख्या पाँच हो गई है, और सभी उत्तर-पूर्वी भारत तथा इसके आस-पास के क्षेत्रों में पाई जाती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की नई खोजें न केवल क्षेत्र
की जैव-विविधता का महत्व बढ़ाती हैं, बल्कि संरक्षण की
आवश्यकता पर भी बल देती हैं। ऐसे दुर्लभ और सीमित वितरण वाले जीव पारिस्थितिक
संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनका संरक्षण स्थानीय
जल-स्रोतों, वनस्पतियों और अन्य
वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए भी आवश्यक है।


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