पराशर झील 2730 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक बहुत ही खूबसुरत झील है | इस झील के साथ में एक बहुत ही खुबसूरत मंदिर है जो पैगौड़ा शैली में बना हुआ है | यह मंदिर 13वीं सदी के दौरान राजा बाण सिंह ने बनवाया था, जो महर्षि पराशर जी का मंदिर है | इस झील के अंदर एक तैरता हुआ टापू है जो पुरे वर्ष अपनी जगह बदलता रहता है | इस झील की गहराई कितनी है यहाँ आज तक कोई भी नहीं जान पाया है | यह झील चारों ओर से सुंदर पहाड़ और जंगलों से घिरी हुई है |
पराशर झील तक कैसे पहुंचें :
पराशर झील हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित है | मंडी-कमांद से पराशर की दुरी लगभग 50 किमी है | दो घंटे की ड्राइव से यहाँ पहुँच सकते हैं | यदि आप बस से जाना चाहते हो तो मंडी से पराशर झील तक स्थानीय एचआरटीसी बस ले सकते हैं। बस से यात्रा में लगभग 2 से 3 घंटे लगते हैं। झील तक पहुँचने से पहले यह बिजनी, कमांद और बग्गी कस्बों से होकर गुजरती है। यहाँ पहुँचने के लिए भुंतर से टैक्सी के द्वारा भी आ सकते हैं |
पौराणिक महत्त्व :
परंपरागत रूप से, ऐसा माना जाता है कि झील का निर्माण ऋषि पराशर द्वारा गुर्ज के प्रहार के परिणामस्वरूप धरती से पानी निकला और झील का आकार लिया। झील के साथ महर्षि पराशर का मंदिर है जो पूरा मंदिर एकल देवदार पेड़ का उपयोग करके बनाया गया था |जून के महीने में सरनाहुली मेला लगता है जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भाग लेते हैं।


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