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भारत ने शुरू किया त्रि-सेवा सैन्य अभ्यास 'पूर्वी प्रहार'

हाल ही में भारत 'पूर्वी प्रहार' नाम से एक अहम सैन्य अभ्यास की तैयारी कर रहा है | यह त्रि-सेवा कार्यक्रम 8 नवंबर से शुरू होकर दस दिनों तक चलता है। इसमें तीनों सेनाएं भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना शामिल हैं। इस अभ्यास का उद्देश्य परिचालन संबंधी तत्परता प्रदर्शित करना और अंतर-सेवा सहयोग को बढ़ाना है।

भारतीय थल सेना

सैन्य अभ्यास 'पूर्वी प्रहार' में भारतीय सेना अहम भूमिका निभाएगी | इसमें विभिन्न इकाइयां और तोपें तैनात की जाएंगी। हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (LCH) और मानव रहित हवाई वाहन (UAV) भी शामिल होंगे। इस सैन्य अभ्यास में सेना अपनी क्षमताओं और तैयारियों को प्रदर्शित करेगी |

भारतीय वायु सेना

भारतीय वायु सेना (IAF) भी इस अभ्यास में अपना योगदान देगी। वायु सेना अपने विमान Su-30 MKI और राफेल सहित उन्नत लड़ाकू जेट तैनात करेगी | C-130J सुपर हरक्यूलिस जैसे परिवहन विमान भी सक्रिय रहेंगे। कोलकाता, हाशिमारा, पानागढ़ और कलाईकुंडा में हवाई अड्डे संचालन का समर्थन करेंगे।

भारतीय नौसेना

भारतीय नौसेना मार्कोस कमांडो की भागीदारी के साथ अभ्यास को बढ़ाएगी। ये विशिष्ट बल समुद्री संचालन में विशेषज्ञ हैं और अभ्यास में एक नया भाग जोड़ देंगे। उनकी भागीदारी संयुक्त अभियानों में नौसैनिक क्षमताओं के महत्व पर जोर देती है।

'पूर्वी प्रहार' का उद्देश्य

'पूर्वी प्रहार' भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। यह चीन के साथ बढ़े तनाव के समय आया है। यह अभ्यास क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। यह संभावित आक्रामकता के विरुद्ध निवारक के रूप में भी कार्य करेगा | इसका प्राथमिक उद्देश्य तीनों सशस्त्र बलों के बीच तालमेल का परीक्षण करना है। इस अभ्यास का उद्देश्य परिचालन तैयारियों को मजबूत करना है। इसका उद्देश्य पूर्वी क्षेत्र में भारत की रक्षा स्थिति को बढ़ावा देना भी है। क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर बेहतर सहयोग आवश्यक है।

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