European History — यूरोपियन इतिहास MCQs
विश्व इतिहास (World History) केवल बीते हुए कल की कहानियाँ नहीं है, बल्कि यह उन ऐतिहासिक घटनाओं, क्रांतियों और महान व्यक्तित्वों की दास्तान है जिन्होंने आज के आधुनिक समाज का निर्माण किया है। चाहे बात फ्रांसीसी क्रांति के दौरान उठी स्वतंत्रता की आवाज़ की हो, या फिर बिस्मार्क और गैरीबाल्डी द्वारा जर्मनी और इटली के एकीकरण की सभी घटनाओं ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा हमेशा के लिए बदल दी।
इसके साथ ही, 18वीं और 19वीं शताब्दी में इंग्लैंड में हुई औद्योगिक क्रांति, नहरों और रेलवे के विकास और अंततः प्रथम विश्व युद्ध की विनाशकारी विभीषिका ने आधुनिक विश्व के इतिहास में कई महत्वपूर्ण अध्याय जोड़े हैं।
यदि आप UPSC, State PSC, SSC, Railways, B.Ed, CTET या Class 9/10 Board Exams जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो विश्व इतिहास के ये मौलिक सिद्धांत और तथ्य आपकी सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
आज के इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपके लिए विश्व इतिहास के 20 सबसे महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न और उनके साथ विस्तृत उत्तर व्याख्या लेकर आए हैं। यह पोस्ट न केवल आपके ज्ञान को परखेगी, बल्कि विषय की गहराई को समझने में भी आपकी पूरी मदद करेगी। चलिए, पढ़ना शुरू करते हैं!
यहाँ पर यूरोपियन इतिहास से संबंधित बहुत महत्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नोत्तर सूची तैयार की गई है।
यह सूची प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे HPPSC, HPSSC, Police, Patwari, JBT आदि) के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
1. जैकोबिन क्लब का नेता कौन था?
जैकोबिन क्लब (Jacobin Club) फ्रांसीसी क्रांति के दौरान का सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली राजनीतिक क्लब था।
प्रमुख नेता: इस क्लब के सबसे प्रमुख और शक्तिशाली नेता मैक्सिमिलियन रोबेस्पिएरे थे।
आतंक का राज: सन् 1793 से 1794 के बीच फ्रांस में रोबेस्पिएरे का शासनकाल था, जिसे 'आतंक का राज' कहा जाता है। इस दौरान उन्होंने क्रांति के विरोधियों पर सख्त नियंत्रण और सजा की नीति अपनाई।
क्लब के सदस्य: इस क्लब में मुख्य रूप से समाज के कम समृद्ध हिस्सों के लोग शामिल थे, जैसे—छोटे दुकानदार, कारीगर (जैसे जूते बनाने वाले, घड़ीसाज़), दिहाड़ी मज़दूर और नौकर।
विशेष पहचान: जैकोबिनों को Sans-culottes भी कहा जाता था, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है—"बिना घुटने वाले कपड़ों के"। वे सत्ताधारी अभिजात वर्ग से खुद को अलग दिखाने के लिए लंबी धारीदार पतलून पहनते थे।
2. फ्रांस को गणतंत्र किसने घोषित किया?
गणतंत्र की स्थापना: 21 सितंबर 1792 को कन्वेंशन ने फ्रांस में राजतंत्र का अंत कर दिया और फ्रांस को एक गणतंत्र घोषित किया।
गणतंत्र का अर्थ: गणतंत्र सरकार का वह रूप है जहाँ जनता अपनी सरकार और उसके प्रमुख को चुनती है। इसमें कोई वंशानुगत शासक पद नहीं होता।
राजशाही का अंत: इसके तुरंत बाद राजा लुई XVI (Louis XVI) पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया गया और 21 जनवरी 1793 को उन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई।
3. इंग्लैंड में नहरें क्यों बनाई गई थीं?
इंग्लैंड में नहरों का निर्माण मुख्य रूप से औद्योगिक क्रांति के दौरान भारी और कम कीमत वाली सामग्रियों के परिवहन के लिए किया गया था।
कोयले की भारी मांग: औद्योगिक क्रांति के कारण कारखानों, भाप के इंजनों और घरों को गर्म रखने के लिए कोयले की बहुत बड़ी मात्रा में आवश्यकता थी।
सड़क परिवहन की सीमाएँ: 18वीं शताब्दी में इंग्लैंड की सड़कें कच्ची, खराब और संकरी थीं। सड़कों के रास्ते भारी कोयला ले जाना बहुत धीमा, कठिन और खर्चीला था।
नहरों का लाभ: पानी के रास्ते नावों द्वारा भारी कोयला ले जाना सड़कों की तुलना में बहुत आसान और सस्ता पड़ता था। नहरों से परिवहन लागत लगभग आधी हो गई थी। वर्स्ले कैनाल : इंग्लैंड की पहली प्रसिद्ध नहर 'वर्स्ले कैनाल' जो 1761 में जेम्स ब्रिंडली द्वारा बनाई गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य वर्स्ले की खदानों से मैनचेस्टर शहर तक सीधे कोयला पहुँचाना था।
4. 1850 तक ब्रिटेन का अधिकतर भाग किससे जुड़ गया?
19वीं शताब्दी के मध्य तक ब्रिटेन में रेलवे नेटवर्क का निर्माण बहुत तेज़ी से हुआ, जिसने पूरे देश के परिवहन ढाँचे को पूरी तरह बदल दिया था |
रेलवे मेनिया: 1830 से 1850 के दौरान ब्रिटेन में रेल लाइनों का जाल बिछाने की होड़ लग गई | इसे 'रेलवे मेनिया' कहा जाता है | 1850 तक ब्रिटेन में लगभग 6,000 मील से अधिक लंबी रेलवे लाइनें बिछाई जा चुकी थीं।
सस्ते और तेज़ परिवहन का साधन: रेलवे ने नहरों और घोड़ा-गाड़ियों की तुलना में यात्रियों और भारी सामान (जैसे कोयला, लोहा और औद्योगिक उत्पाद) को बहुत कम समय और कम लागत में एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाना संभव बनाया।
समय का मानकीकरण : रेलवे के समय-सारणी को सुचारू रूप से चलाने के लिए पूरे ब्रिटेन में एक समान समय की आवश्यकता महसूस हुई। इसके परिणामस्वरूप ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) को मानक रेलवे समय के रूप में अपनाया गया, जिसे बाद में पूरे देश का मानक समय माना गया।
आर्थिक विकास को गति: रेलवे नेटवर्क से प्रमुख औद्योगिक शहरों, बंदरगाहों और ग्रामीण क्षेत्रों के आपस में जुड़ने से व्यापार, उद्योग और कृषि को बहुत बड़ा बढ़ावा मिला।
5. पहला 'ब्लास्ट फर्नेस' किसने बनाया?
लोहा उद्योग के इतिहास में अब्राहम डार्बी प्रथम का आविष्कार एक मील का पत्थर साबित हुआ, जिसने औद्योगिक क्रांति की दिशा ही बदल दी।
1709 का ऐतिहासिक आविष्कार: अब्राहम डार्बी प्रथम ने सन् 1709 में इंग्लैंड के कोलब्रुकडेल में पहली बार कोक से चलने वाली धमन भट्टी का आविष्कार किया।
कोक का इस्तेमाल: इससे पहले लोहे को पिघलाने के लिए लकड़ी के कोयले का उपयोग किया जाता था, जो बहुत महंगा और दुर्लभ था। डार्बी ने कोयले को गर्म करके बनाए गए 'कोक' का उपयोग भट्टी के ईधन के रूप में किया।
पिघले लोहे की बेहतर गुणवत्ता: कोक से चलने वाली भट्टी उच्च तापमान पैदा कर सकती थी, जिससे कच्चा लोहा अधिक मात्रा में और बेहतर गुणवत्ता के साथ पिघलना संभव हुआ |
सस्ते लोहे का उत्पादन: इस तकनीक के कारण ढलवां लोहा बनाना बहुत आसान और सस्ता हो गया, जिससे आगे चलकर लोहे के पुल, बर्तन, मशीनें और रेलवे पटरियाँ बनाना संभव हो सका।
6. "बाड़बंदी आंदोलन" कब शुरू हुआ था?
ब्रिटेन (इंग्लैंड) में कृषि क्रांति के दौरान चला बाड़बंदी आंदोलन एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना थी।
आंदोलन का अर्थ: बाड़बंदी का अर्थ था कि पहले जो ज़मीनें 'साझा या सार्वजनिक' होती थीं और जहाँ सभी ग्रामीण अपने पशु चरा सकते थे या खेती कर सकते थे, उन ज़मीनों को घेरकर बाड़ लगा दी गई और उन्हें निजी संपत्ति में बदल दिया गया।
संसदीय कानून: यद्यपि बाड़बंदी प्रक्रिया पहले से चल रही थी, लेकिन 1760 के दशक से 1840 के बीच ब्रिटिश संसद ने 4,000 से अधिक 'एन्क्लोज़र एक्ट' पास किए, जिससे यह आंदोलन चरम पर पहुँच गया।
बड़े भू-स्वामियों का फ़ायदा: अमीर जमींदारों ने बाड़बंदी करके बड़ी-बड़ी जमीनों पर वैज्ञानिक तरीकों से खेती करना शुरू किया।
छोटे किसानों पर प्रभाव: इस आंदोलन के कारण छोटे किसानों, मजदूरों और गरीबों से उनकी पारंपरिक साझा ज़मीनें छिन गईं। इस वजह से भूमिहीन किसान गाँव छोड़कर शहरों की ओर जाने लगे और कारखानों में मज़दूरी करने लगे, जिसने औद्योगिक क्रांति को श्रम बल प्रदान किया।
7. "यंग इटली" संगठन किसने स्थापित किया?
इतालवी राष्ट्रवादी और विचारक ग्यूसेप मैजिनी (Giuseppe Mazzini) ने इटली की आज़ादी और एकीकरण के उद्देश्य से 'यंग इटली' (जियोवेने इटालिया) नाम की गुप्त संस्था का गठन किया था।
गठन और समय: इस क्रांतिकारी संगठन की नींव 1831 में फ्रांसीसी शहर मार्सेई में रखी गई थी |
मुख्य उद्देश्य: इसका प्राथमिक लक्ष्य इटली के बिखरे हुए राज्यों को ऑस्ट्रियाई और अन्य विदेशी नियंत्रण से मुक्त कराना था| मैजिनी इटली को एक अखंड, लोकतांत्रिक और सर्वसत्तात्मक गणराज्य के रूप में स्थापित करना चाहते थे| | युवा शक्ति पर विश्वास: मैजिनी का मानना था कि परिवर्तन की वास्तविक शक्ति देश के युवाओं में निहित है| इसलिए उन्होंने 40 वर्ष से कम आयु के उत्साही युवाओं को इस मुहीम से जोड़ा। |
विचारधारा का प्रसार: इस संगठन की सफलता के बाद मैजिनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्रता के विचारों को फैलाने के लिए 1834 में बर्न में 'यंग यूरोप' नाम से एक अन्य गुप्त समूह की स्थापना भी की।
विरोधी प्रतिक्रिया: मैजिनी के उग्र राष्ट्रवादी सिद्धांतों से घबराकर ऑस्ट्रियाई कूटनीतिज्ञ मैटरनिक ने उन्हें यूरोप की स्थापित सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था के लिए "सबसे बड़ा खतरा" बताया था।
8. जर्मनी के एकीकरण का मुख्य वास्तुकार कौन था?
आधुनिक जर्मन साम्राज्य के निर्माण और एकीकरण का वास्तविक श्रेय प्रशिया के कूटनीतिज्ञ ओटो वॉन बिस्मार्क को दिया जाता है। 'रक्त और लोहे' की नीति (Blood and Iron Policy): बिस्मार्क का मानना था कि जर्मनी का एकीकरण भाषणों या बहुमत के प्रस्तावों से नहीं, बल्कि सैन्य ताकत और युद्ध से संभव होगा। इसी विचारधारा को उनकी "रक्त और लौह" की नीति कहा जाता है।
तीन प्रमुख निर्णायक युद्ध: बिस्मार्क ने अपनी चतुर कूटनीति से 7 वर्षों की अवधि में तीन मुख्य युद्ध लड़े—डेनमार्क (1864), ऑस्ट्रिया (1866) और फ्रांस (1870-71)। इन तीनों युद्धों में प्रशिया की जीत ने एकीकरण के मार्ग को सुगम बनाया।
जर्मन साम्राज्य की घोषणा: फ्रांस पर विजय पाने के बाद 18 जनवरी 1871 को वर्साय के महल में प्रशिया के राजा 'विलियम प्रथम' को एकीकृत जर्मनी का सम्राट घोषित किया गया। बिस्मार्क की भूमिका: इस पूरे घटनाक्रम में बिस्मार्क ने मुख्य योजनाकार और रणनीतिकार की भूमिका निभाई, जिसके कारण उन्हें "आधुनिक जर्मनी का जनक" या मुख्य वास्तुकार कहा जाता है।
9. बिस्मार्क की नीति किस नाम से जानी जाती है?
नीति की पृष्ठभूमि: 30 सितंबर 1862 को प्रशिया की बजट समिति के समक्ष भाषण देते हुए बिस्मार्क ने कहा था कि "समय के महान प्रश्न भाषणों या बहुमत के प्रस्तावों द्वारा तय नहीं होंगे, बल्कि यह कार्य केवल लोहे और रक्त से ही संभव होगा।"
नीति का वास्तविक अर्थ:
लौह (Iron): औद्योगिक क्रांति के युग में आधुनिक हथियारों, तोपों, रेलवे और मजबूत सैन्य बुनियादी ढांचे का प्रतीक।
रक्त (Blood): राष्ट्र के एकीकरण के लिए युद्ध भूमि में सैनिकों द्वारा बहाए जाने वाले बलिदान और सैन्य बल का प्रतीक।
व्यावहारिक प्रयोग: बिस्मार्क ने वार्ता और कूटनीतिक समझौतों की विफलता को भांपते हुए सैन्य अभियानों पर पूरा भरोसा जताया। इसी कठोर नीति का प्रयोग कर उन्होंने तीन प्रमुख युद्धों के जरिए छोटे-छोटे जर्मन रियासतों को मिलाकर एक शक्तिशाली जर्मन साम्राज्य का निर्माण किया।
10. 1871 में एकीकृत जर्मनी का सम्राट कौन बना?
जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद प्रशिया के राजा विलियम प्रथम (Wilhelm I) को नवनिर्मित जर्मन साम्राज्य का प्रथम सम्राट (Kaiser) घोषित किया गया।
ऐतिहासिक ताजपोशी का स्थल: 18 जनवरी 1871 को फ्रांस के प्रसिद्ध 'वर्साय के महल' में एक भव्य समारोह का आयोजन हुआ, जहाँ जर्मन राजकुमारों, सेनापतियों और चांसलर बिस्मार्क की मौजूदगी में विलियम प्रथम को जर्मन सम्राट के रूप में स्वीकार किया गया।
समारोह का राजनीतिक संदेश: फ्रांस-प्रशिया युद्ध (1870-71) में फ्रांस को हराने के तुरंत बाद फ्रांसीसी सरजमीं पर ही इस साम्राज्य की घोषणा करना यूरोपीय राजनीति में एक नए और शक्तिशाली जर्मन राष्ट्र के उदय का प्रतीक था।
शासन व्यवस्था: विलियम प्रथम के सम्राट बनने के साथ ही 'द्वितीय जर्मन साम्राज्य' का आरंभ हुआ, जिसमें प्रशासनिक व कूटनीतिक शक्तियाँ मुख्य रूप से उनके चांसलर ओटो वॉन बिस्मार्क के हाथों में रहीं।
11. "रेड शर्ट्स" का नेता कौन था?
इतालवी क्रांति के महान योद्धा और राष्ट्रीय नायक ग्यूसेप गैरीबाल्डी को प्रसिद्ध स्वयंसेवी सेना "रेड शर्ट्स" का संस्थापक और नेता माना जाता है।
संगठन का नाम: इस क्रांतिकारी सैन्य दल के सदस्य पहचान के रूप में विशेष लाल रंग की कमीज़ या कुर्ती पहनते थे, जिसके कारण इन्हें 'रेड शर्ट्स' या Camicie Rosse कहा गया।
'हज़ार योद्धाओं का अभियान': 1860 में गैरीबाल्डी ने अपने लगभग 1,000 लाल-कुर्तीधारी स्वयंसेवकों के साथ दक्षिणी इटली के 'दो सिचिलियों के साम्राज्य' पर आक्रमण किया। स्थानीय किसानों और जनता के सहयोग से उन्होंने स्पेन के बोर्बोन राजवंश को उखाड़ फेंका।
त्याग और देशभक्ति: गैरीबाल्डी ने जीते हुए सभी दक्षिणी इतालवी क्षेत्रों को स्वयं राजा बनने के बजाय इटली के भावी सम्राट विक्टर इमैनुएल द्वितीय को सौंप दिया और स्वयं एक साधारण किसान का जीवन जीने कैप्रेरा द्वीप लौट गए। इटली का तलवार: इटली के एकीकरण में जहाँ मैजिनी को 'हृदय' और कैवूर को 'मस्तिष्क' कहा जाता है, वहीं गैरीबाल्डी को इटली की 'तलवार' की उपाधि दी गई है।
12. प्रशा का नेतृत्व किसने किया जिससे जर्मनी का एकीकरण हुआ?
जर्मनी के राष्ट्रीय एकीकरण का नेतृत्व प्रशिया राज्य ने किया, जिसकी बागडोर राजा विलियम प्रथम और उनके योग्य चांसलर ओटो वॉन बिस्मार्क के हाथों में थी। विलियम प्रथम का योगदान: 1861 में प्रशिया की गद्दी पर बैठते ही विलियम प्रथम ने सैन्य सुधारों को प्राथमिकता दी। उन्होंने प्रशिया की सेना को आधुनिक बनाने के लिए बिस्मार्क को चांसलर नियुक्त किया और उन्हें पूर्ण राजनीतिक स्वतंत्रता दी। बिस्मार्क की कूटनीति: बिस्मार्क ने कुशल कूटनीति और अपनी "रक्त और लौह" की नीति के बल पर प्रशियाई सेना को मजबूत किया। उन्होंने पड़ोसी शक्तियों—डेनमार्क, ऑस्ट्रिया और फ्रांस—को योजनाबद्ध युद्धों में हराकर जर्मन रियासतों को एकत्र किया। सफल साझेदारी: जहाँ विलियम प्रथम ने राजकीय शक्ति और सैन्य सहयोग प्रदान किया, वहीं बिस्मार्क ने रणनीतिक योजनाएँ और नीतियाँ बनाईं। इस दोहरे नेतृत्व ने 1871 में एक एकीकृत जर्मन साम्राज्य की नींव रखी।|
13. इटली का एकीकरण किस युद्ध के बाद पूरा हुआ?
इटली के एकीकरण की अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी रोम का विलय था, जो फ्रांस–प्रशा युद्ध (Franco-Prussian War, 1870-71) के दौरान संभव हुआ।
रोम की सुरक्षा में फ्रांसीसी सेना: 1870 से पहले पोप के नियंत्रण वाले रोम शहर की रक्षा के लिए फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन तृतीय की सेना तैनात थी। इस वजह से इतालवी सेना रोम पर अधिकार नहीं कर पा रही थी।
युद्ध का घटनाक्रम: जब 1870 में फ्रांस और प्रशिया के बीच युद्ध छिड़ा, तो नेपोलियन तृतीय को अपनी सेना रोम से वापस बुलानी पड़ी। रोम पर नियंत्रण और एकीकरण की पूर्णता: फ्रांसीसी सेना के हटते ही इतालवी राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय की सेना ने सितंबर 1870 में रोम में प्रवेश किया और उस पर अधिकार कर लिया। इसके बाद रोम को एकीकृत इटली की आधिकारिक राजधानी घोषित किया गया।
14. 1861 में एकीकृत इटली का पहला राजा कौन बना?
आधिकारिक घोषणा: 17 मार्च 1861 को ट्यूरिन में आयोजित संसद की पहली बैठक में आधिकारिक तौर पर विक्टर इमैनुएल द्वितीय को सर्वसम्मति से 'एकीकृत इटली का राजा' घोषित किया गया।
सामूहिक प्रयासों का परिणाम: यह ऐतिहासिक क्षण काउंट कैवूर की कूटनीतिक सूझबूझ, ग्यूसेप गैरीबाल्डी के सैन्य अभियानों और ग्यूसेप मैजिनी के राष्ट्रवादी विचारों के संयुक्त प्रयासों से संभव हो सका था।
'राष्ट्रपिता' की उपाधि: इतालवी जनता के बीच उन्हें अत्यंत सम्मान प्राप्त था और उन्हें इटली में "पाद्रे देल्ला पात्रिया" अर्थात राष्ट्र के पिता की उपाधि दी गई।
राजधानी का क्रमिक स्थानांतरण: 1861 में इटली की पहली राजधानी ट्यूरिन बनी, जिसे बाद में फ्लोरेंस और अंततः 1871 में रोम स्थानांतरित किया गया।
15. कार्बोनारी क्या था?
कार्बोनारी 19वीं शताब्दी के शुरुआती दशकों में इटली में सक्रिय एक अत्यंत प्रभावशाली गुप्त क्रांतिकारी संगठन था। नाम का अर्थ: 'कार्बोनारी' शब्द का इतालवी भाषा में शाब्दिक अर्थ "कोयला बनाने वाले" होता है। क्रांतिकारियों ने अपनी गुप्त बैठकों और पहचान को छिपाने के लिए कोयला कारोबारियों की सांकेतिक भाषा, प्रतीकों और परंपराओं को अपनाया था।
संगठन की उत्पत्ति व उद्देश्य: इस संगठन की शुरुआत लगभग 1800-1810 के दौरान दक्षिणी इटली के नेपल्स में हुई थी। इसका मुख्य कार्य विदेशी निरंकुश शासन विशेषकर ऑस्ट्रियाई और बोर्बोन प्रभाव को समाप्त करना तथा देश में संवैधानिक स्वतंत्रता व लोकतांत्रिक सुधार लाना था|
इतालवी राष्ट्रीयता की नींव: यद्यपि कार्बोनारी के शुरुआती सशस्त्र विद्रोह पूरी तरह सफल नहीं हो सके, लेकिन इसने इटली के लोगों में राष्ट्रवाद और आज़ादी की चिंगारी जगाई|
प्रमुख हस्तियों से संबंध: इटली के महान क्रांतिकारी ग्यूसेप मैजिनी ने अपने शुरुआती दिनों में इसी कार्बोनारी संगठन के सदस्य के रूप में अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों की शुरुआत की थी।
16. प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण क्या था?
प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के पीछे कई दीर्घकालिक कारण मौजूद थे, लेकिन इसे तुरंत भड़काने वाली मुख्य चिंगारी सोनिया/साराजेवो हत्याकांड बनी।
घटना और स्थान: 28 जून 1914 को ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य के उत्तराधिकारी आर्कड्यूक फ्रांज फर्डिनेंड (Archduke Franz Ferdinand) और उनकी पत्नी सोफी की बोस्निया की राजधानी साराजेवो में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
हत्यारा और संगठन: यह हत्या सर्बियाई राष्ट्रवादी संगठन 'ब्लैक हैंड' से जुड़े एक युवा बोस्नियाई-सर्ब गैवरिलो प्रिसिप ने की थी।
युद्ध की शुरुआत: ऑस्ट्रिया-हंगरी ने इस हत्याकांड के लिए सर्बिया को जिम्मेदार ठहराया और उसे एक सख्त अल्टीमेटम दिया। जब सर्बिया ने सभी शर्तें मानने से इनकार किया, तो ऑस्ट्रिया-हंगरी ने 28 जुलाई 1914 को सर्बिया के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी।
वैश्विक फैलाव: गुप्त संधियों के तंत्र के कारण रूस सर्बिया की मदद के लिए आया, जिसके जवाब में जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन भी युद्ध में कूद पड़े और यह क्षेत्रीय विवाद कुछ ही दिनों में 'प्रथम विश्व युद्ध' में बदल गया।
17. इनमें से कौन मित्र राष्ट्रों में शामिल नहीं था?
मित्र राष्ट्र (Allies): प्रथम विश्व युद्ध में मित्र राष्ट्रों के गुट में मुख्य रूप से ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और बाद में (1817 में) अमेरिका शामिल हुआ था।
केंद्रीय शक्तियाँ: जर्मनी विरोधी गुट का मुख्य अगुआ था। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, उस्मानिया साम्राज्य (ऑटोमन साम्राज्य) और बुल्गारिया एक साथ मिलकर युद्ध लड़ रहे थे।
द्वितीय विश्व युद्ध की स्थिति: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी जर्मनी मित्र राष्ट्रों के खिलाफ था और उसने इटली तथा जापान के साथ मिलकर 'धुरी राष्ट्रों' का नेतृत्व किया था।
18. प्रथम विश्व युद्ध किस संधि से समाप्त हुआ?
हस्ताक्षर का स्थान: यह संधि ठीक उसी स्थान यानी फ्रांस के पेरिस स्थित वर्साय के महल के 'शीशमहल' में हस्ताक्षरित हुई थी, जहाँ 1871 में जर्मनी ने अपने साम्राज्य का गठन किया था।
युद्ध का दोषी किसे माना गया: इस संधि के तहत युद्ध की पूरी तबाही और तबाही के नुकसान के लिए जर्मनी को मुख्य अपराधी ठहराया गया। कठोर शर्तें और जुर्माना: जर्मनी पर भारी आर्थिक क्षतिपूर्ति थोपी गई। उसकी सेना का आकार सीमित कर दिया गया | जर्मनी से उसके उपनिवेश छीन लिए गए तथा उसके अलसेस-लॉरेन जैसे समृद्ध भूभाग फ्रांस को लौटा दिए गए।
द्वितीय विश्व युद्ध का बीज: इतिहासकारों का मानना है कि जर्मनी पर थोपी गई यह अपमानजनक संधि ही आगे चलकर जर्मन जनता में असंतोष और हिटलर के उदय का कारण बनी, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध की नींव रखी।
19. प्रथम विश्व युद्ध में नया हथियार क्या था?
प्रथम विश्व युद्ध औद्योगिक क्रांति के बाद लड़ा गया पहला आधुनिक युद्ध था, जिसमें नए और आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया गया। इनमें से सबसे भयानक और भयावह नया हथियार रासायनिक ज़हरीली गैस था |
पहला बड़ा रासायनिक हमला: जर्मनी ने अप्रैल 1915 में बेल्जियम के 'यिप्रेस' की लड़ाई में मित्र राष्ट्रों की खाइयों की तरफ पहली बार बड़े पैमाने पर क्लोरीन गैस छोड़ी थी।
प्रयुक्त प्रमुख गैसें: युद्ध के दौरान मुख्य रूप से तीन प्रकार के रसायनों का इस्तेमाल किया गया—
क्लोरीन गैस: आँखों और फेफड़ों को नुकसान पहुँचाती थी।
फॉसजीन गैस: यह रंगहीन और अत्यधिक विषैली गैस थी, जिससे फेफड़ों में पानी भर जाता था|
मस्टर्ड गैस: यह त्वचा पर बड़े-बड़े छाले पैदा कर देती थी और कपड़ों के पार भी असर करती थी।
बचाव के साधन: ज़हरीली गैसों के घातक असर से बचने के लिए युद्ध क्षेत्र में सैनिकों के लिए 'गैस मास्क' अनिवार्य कर दिए गए।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध: रासायनिक हथियारों की इस भयंकर विभीषिका को देखते हुए युद्ध के बाद 1925 में 'जेनेवा प्रोटोकॉल' के तहत युद्ध में रासायनिक और जैविक हथियारों के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया।
20. गैरीबाल्डी किस देश के एकीकरण से जुड़े थे?
दक्षिणी इटली की मुक्ति: गैरीबाल्डी ने अपनी स्वयंसेवी सेना 'रेड शर्ट्स' के साथ मिलकर 1860 में 'हज़ार योद्धाओं के अभियान' का नेतृत्व किया। उन्होंने नेपल्स और सिचिली से विदेशी बोर्बोन राजवंश के शासन को उखाड़ फेंका|
निःस्वार्थ राष्ट्रप्रेम: दक्षिणी इटली पर विजय प्राप्त करने के बाद, उन्होंने बिना किसी व्यक्तिगत सत्ता के लालच के उन सभी जीते हुए प्रदेशों को सार्डिनिया-पीडमोंट के राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय को सौंप दिया, जिससे एक एकीकृत इतालवी राष्ट्र के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।
इटली के एकीकरण के तीन स्तंभ: इतालवी एकीकरण के इतिहास में तीन हस्तियों का योगदान सर्वोपरि माना जाता है—
ग्यूसेप मैजिनी: एकीकरण के 'वैचारिक प्रणेता' (हृदय)।
काउंट कैवूर: कूटनीतिक 'रणनीतिकार' (मस्तिष्क)।
ग्यूसेप गैरीबाल्डी: सैन्य 'योद्धा' (तलवार)।
मैजिनी, गैरीबाल्डी, कैवूर और बिस्मार्क जैसे महान रणनीतिकारों की नीतियों ने न केवल यूरोप का नक्शा बदला, बल्कि आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की नींव भी रखी। वहीं दूसरी ओर, इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति के दौरान नहरों और रेलवे के विकास ने जहाँ आर्थिक प्रगति को नई रफ्तार दी, वहीं बाड़बंदी आंदोलन ने सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित किया।
इन सभी ऐतिहासिक परिवर्तनों, साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्धाओं और सैन्य गठबंधनों का अंतिम परिणति प्रथम विश्व युद्ध के रूप में सामने आई, जिसने वैश्विक राजनीति को पूरी तरह बदल कर रख दिया।
इतिहास के ये सभी प्रश्न और उनकी विस्तृत व्याख्याएँ आपकी आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPSC, SSC, State PSC, Railway और Class 9/10 Board Exams) के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होंगी।
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