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Sunday, August 16, 2026

जब 20,000 एमू ने ऑस्ट्रेलियन सेना को चटाई धूल 'ग्रेट एमू वॉर' की अनोखी कहानी | EMU VS ARMY

यह बात है 1932 के आखिर की, तब ऑस्ट्रेलिया को एक अजीबोगरीब संकट का सामना करना पड़ा जब लगभग 20,000 एमू पक्षी पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के कैंपियन ज़िले में आ गए और गेहूं की फसलें बर्बाद करने लगे। 

EMU
EMU

उस समय वहां की सरकार ने मेजर G.P.W. मेरेडिथ की अगुवाई में सैनिकों को लुईस मशीन गन के साथ तैनात किया, लेकिन ये पक्षी इतने फुर्तीले थे कि ये गोलियों से बच कर आसानी से तितर-बितर हो गए और पूरी सेना को चकमा दे दिया, जिससे वहां की  सेना को शर्मनाक तरीके से पीछे हटना पड़ा। 


ARMY

इस संकट का कारण: 1932 के आखिर में जब ऑस्ट्रेलिया में भयंकर सूखे के कारण लगभग 20,000 एमू पक्षी खेती वाले इलाकों की ओर बढ़ गए, जहाँ पर उन्होंने किसानों की ज़मीन पर पानी और खाना मिल गया। किसानों ने उन पक्षियों को भगाने का प्रयास किया लेकिन वे उसमें नाकाम रहे |

ARMY VS EMU

सेना का इस्तेमाल : वहां के किसान इन एमु पक्षियों को रोकने में असफल हुए हो उन्होंने सरकार से इस समस्या का समाधान करने को कहा | सरकार ने रॉयल ऑस्ट्रेलियन आर्टिलरी के मेजर G.P.W. मेरेडिथ को इसके निवारण के लिए भेजा | मेरेडिथ की अगुवाई में, सैनिकों ने दो लुईस मशीन गन और लगभग 10,000 राउंड गोला-बारूद का इस्तेमाल किया। 


पक्षियों की रणनीति: एमू पक्षियों ने गुरिल्ला-स्टाइल में बचने की रणनीति अपनाई, वे छोटे-छोटे, तेज़ी से चलने वाले समूहों में बंट गए, एमु पक्षियों की इस  रणनीति से अपना बचाव किया और सेना के ट्रकों से भी तेज़ दौड़े।

ARMY

 नतीजा: लगभग 10,000 राउंड गोलियां चलाने के बाद भी बहुत कम संख्या में एमू मारे गए, जिससे मीडिया ने इस ऑपरेशन का मज़ाक उड़ाया जिसके परिणामस्वरूप इस ऑपरेशन को बंद कर दिया गया।

 इनामी व्यवस्था: सेना की सीधी कार्रवाई नाकाम रही, जिससे सरकार को बाद में आम लोगों को इनाम देने वाली व्यवस्था पर निर्भर होना पड़ा, जो सेना ऑपरेशन के मुकाबले कहीं ज़्यादा असरदार साबित हुई। 

यह घटना इतिहास में एक मज़ेदार और अनोखी घटना के तौर पर याद की जाती है, जिसमें उड़ न सकने वाले पक्षियों ने इंसानी सेना के खिलाफ़ अपने इलाके का सफलतापूर्वक बचाव किया।

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